
शाहदरा विवाद के बाद पुलिस मुख्यालय पर जुटे थे सैकड़ों पुलिसकर्मी, एसएचओ अरुण कुमार प्रदर्शन से रहे नदारद; आयुक्त ने हर सप्ताह संपर्क सभा करने के दिए निर्देश
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस में शाहदरा पुलिस-वकील विवाद के बाद शुरू हुआ तनाव अब महकमे के भीतर भी चर्चा का विषय बन गया है। पुलिस मुख्यालय पर अपने ही विभाग के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ सोशल मीडिया पर निशाने पर हैं। उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही हैं और एक पोस्ट में उन्हें 'कॉकरोच' तक कहा गया है।
वहीं, इस प्रदर्शन में शाहदरा पुलिस स्टेशन के एसएचओ अरुण कुमार शामिल नहीं हुए। गौरतलब है कि पुलिस-वकील विवाद की शुरुआत एसएचओ अरुण कुमार के स्तर से हुई थी। दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने इस मामले में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और एसएचओ अरुण कुमार, दोनों का तबादला किया था। इसके विरोध में एसीपी वशिष्ठ के नेतृत्व में सैकड़ों पुलिसकर्मी मुख्यालय पहुंचे थे, लेकिन एसएचओ अरुण कुमार पूरे दिन प्रदर्शन से दूर रहे।
मंगलवार सुबह सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है। पोस्ट में दो वीडियो भी साझा किए गए। इनमें से एक वीडियो जयपुर का बताया जा रहा है, जबकि दूसरा पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन से जुड़ा था। दिल्ली पुलिस ने फैक्ट चेक के जरिए स्पष्ट किया कि जयपुर से संबंधित वीडियो फर्जी है।
प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने इसे पुलिसकर्मियों का स्वाभाविक आह्वान बताया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को गुंडागर्दी का सामना करना पड़ रहा है और थानों के भीतर पैदा हो रही सुरक्षा संबंधी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस स्टेशन ही सुरक्षित नहीं हैं, तो किसी अन्य स्थान को सुरक्षित कैसे माना जा सकता है।
पुलिसकर्मियों के गुस्से और उनकी समस्याओं को देखते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने मंगलवार दोपहर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने डीसीपी और उनसे वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से पुलिसकर्मियों के बीच जाएं और उनकी समस्याएं सुनें।
आयुक्त ने हर सप्ताह संपर्क सभा आयोजित करने के भी निर्देश दिए, ताकि पुलिसकर्मियों की परेशानियों, शिकायतों और शंकाओं का समाधान किया जा सके। प्रदर्शन के बाद पुलिस मुख्यालय की ओर से उठाया गया यह कदम महकमे के भीतर बढ़ते असंतोष को दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

