
नई दिल्ली। दिल्ली के बवाना औद्योगिक क्षेत्र में वर्षों से आवंटन का इंतजार कर रहे 3,164 फ्लैटों में मजदूरों को बसाने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है। दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (DSIIDC) ने इन फ्लैटों की मजबूती की जांच और जरूरी कानूनी मंजूरियां हासिल करने की प्रक्रिया शुरू की है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने और जांच रिपोर्ट का आईआईटी या किसी समकक्ष प्रमुख सरकारी तकनीकी संस्थान से सत्यापन होने के बाद फ्लैटों के आवंटन का रास्ता साफ हो सकेगा।
233 ब्लॉकों की होगी मजबूती की जांच
बवाना आवासीय परिसर में वर्ष 2008 से 2011 के बीच 233 ब्लॉकों में ये फ्लैट बनाए गए थे। इनमें 92 ब्लॉक जी+3 और 141 ब्लॉक जी+2 मंजिल के हैं। इमारतों की स्थिति जांचने के लिए नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट (NDT), कोर कटिंग और कंप्रेसिव स्ट्रेंथ टेस्ट सहित विभिन्न तकनीकी परीक्षण कराए जाएंगे।
जांच के दौरान इमारतों की मजबूती, कंक्रीट की गुणवत्ता और संभावित कमजोरियों का आकलन किया जाएगा। यदि कहीं दरार या अन्य खामियां मिलती हैं, तो उनकी मरम्मत और इमारतों को मजबूत करने के उपाय सुझाए जाएंगे। इसके साथ ही मरम्मत पर आने वाले संभावित खर्च का आकलन भी किया जाएगा। पूरी ऑडिट रिपोर्ट का तकनीकी सत्यापन आईआईटी या किसी अन्य प्रमुख सरकारी संस्थान से कराया जाएगा।
120 दिन में पूरी करनी होंगी जरूरी औपचारिकताएं
फ्लैटों का आवंटन करने से पहले ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और अन्य जरूरी वैधानिक मंजूरियां हासिल करनी होंगी। इसके लिए 120 दिन की समयसीमा तय की गई है। इस दौरान एमसीडी, अग्निशमन विभाग, दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन, दिल्ली जल बोर्ड और डीडीए से संबंधित नक्शों, लेआउट और अनापत्ति प्रमाणपत्रों (NOC) की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इन औपचारिकताओं का उद्देश्य फ्लैटों के आवंटन और कब्जा देने के दौरान आने वाली कानूनी अड़चनों को दूर करना है।
दो श्रेणियों में बनाए गए हैं फ्लैट
औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले कम आय वर्ग के श्रमिकों के लिए बनाए गए फ्लैट दो श्रेणियों में हैं। टाइप-1 के 1,500 फ्लैटों का कारपेट एरिया 24.44 वर्ग मीटर है, जबकि टाइप-2 के 1,664 फ्लैटों का कारपेट एरिया 27.68 वर्ग मीटर है।
लंबे समय से आवंटन की प्रतीक्षा कर रहे श्रमिक परिवारों के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्हें आशियाना मिलने से पहले इमारतों की सुरक्षा जांच, तकनीकी सत्यापन और सभी जरूरी मंजूरियों का पूरा होना आवश्यक होगा।
देरी पर एजेंसी के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान
काम में देरी रोकने के लिए डीएसआईआईडीसी ने एजेंसी के अनुबंध में जुर्माने का प्रावधान भी रखा है। निर्धारित शर्तों के अनुसार, 60 दिन से अधिक की देरी पर हर महीने अनुबंध राशि का एक प्रतिशत जुर्माना लगाया जा सकता है। इसकी अधिकतम सीमा अनुबंध राशि का 10 प्रतिशत होगी। गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज देने पर सुरक्षा राशि जब्त करने और एजेंसी को दो साल तक सरकारी कार्यों से बाहर करने का प्रावधान भी बताया गया है।