
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, रैली में करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने की स्थिति में दिल्ली में 15 हजार से 20 हजार वाहन पहुंच सकते हैं। संगठन का अनुमान है कि इनमें 10 से 12 हजार बड़ी बसें और पांच से सात हजार छोटी गाड़ियां शामिल हो सकती हैं। हालांकि, वाहनों की वास्तविक संख्या और यातायात पर पड़ने वाले असर को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
व्यापारियों ने चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, करोल बाग और पहाड़गंज समेत पुरानी दिल्ली के कई प्रमुख कारोबारी क्षेत्रों में यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि दिवाली के बाद भी बाजारों में खरीदारी और माल की आपूर्ति महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में रास्तों पर जाम या प्रतिबंध लगने से व्यापारियों और ग्राहकों को परेशानी हो सकती है।
CTI को यह भी आशंका है कि रैली की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था के चलते 31 अक्तूबर से कुछ मार्गों पर बैरिकेडिंग या यातायात प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक यातायात आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।
CTI ने पत्र में दावा किया है कि 10 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर हुए एक कार्यक्रम के दौरान यातायात प्रभावित होने से कारोबार को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इसी आधार पर संगठन ने आगामी रैली के कारण 10 हजार करोड़ रुपये तक के संभावित नुकसान की आशंका जताई है। यह व्यापारिक संगठन का अनुमान है, स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ा नहीं।
व्यापारियों ने रैली की तारीख 10 नवंबर के बाद रखने के साथ बुराड़ी मैदान और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजन करने का विकल्प भी सुझाया है। CTI का कहना है कि उसका उद्देश्य राजनीतिक कार्यक्रम का विरोध करना नहीं, बल्कि त्योहार के दौरान कारोबार और यातायात को सुचारु बनाए रखना है।
अब व्यापारियों की नजर प्रशासन की यातायात व्यवस्था और रैली के आयोजकों के फैसले पर है। रैली की तारीख में बदलाव होगा या नहीं, इस पर अभी आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।