
ईडी जांच में 92 एकड़ सरकारी जमीन मामले से जुड़े कई खुलासे आए सामने 96 घंटे में हुए फैसलों पर ईडी ने शुरू की गहन पड़ताल भारतेंदु संवाददाता, पठानकोट
पंजाब के पठानकोट में 92 एकड़ शामलात (सरकारी) जमीन से जुड़े करीब 200 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद कई अहम खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसी इस मामले में जमीन हस्तांतरण, अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क की जांच कर रही है।
मामले के अनुसार रावी नदी के किनारे स्थित 92 एकड़ जमीन को लेकर कथित तौर पर महज 96 घंटे के भीतर बड़े प्रशासनिक फैसले लिए गए। आरोप है कि 28 साल से प्रमोशन का इंतजार कर रहे तत्कालीन बीडीपीओ कुलदीप सिंह को अचानक प्रमोट कर जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी बनाया गया और उन्हें अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) का चार्ज भी सौंप दिया गया।
चार्ज संभालने के तीसरे दिन 27 फरवरी 2023 को कुलदीप सिंह ने इस शामलात जमीन को छह महिलाओं के नाम करने का आदेश जारी कर दिया। आरोप है कि इस दौरान पंचायत का पक्ष नहीं सुना गया और सभी दस्तावेजों की पूरी जांच भी नहीं की गई। इसके अगले ही दिन अधिकारी रिटायर हो गए।
गोल पंचायत ने इस मामले को उठाते हुए मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री और मुख्य सचिव को शिकायत दी थी। इसके बाद विजिलेंस ब्यूरो अमृतसर ने अगस्त 2023 में रिटायर्ड अधिकारी कुलदीप सिंह समेत नौ लोगों के खिलाफ जालसाजी, भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया था।
अब जुलाई 2026 में ईडी ने पठानकोट में 16 ठिकानों पर छापेमारी कर जांच को आगे बढ़ाया है। कार्रवाई के दौरान करीब 1.75 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए और 91.34 लाख रुपये के बैंक बैलेंस को फ्रीज किया गया है।
ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन हस्तांतरण के पीछे किसका दबाव था और इससे किन लोगों को लाभ पहुंचा। इसके अलावा रावी नदी क्षेत्र में कथित अवैध खनन की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी के अनुसार कुछ स्टोन क्रशर कंपनियां भी जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि बिना अनुमति और रॉयल्टी भुगतान के रेत व अन्य खनिजों का कारोबार किया गया। ईडी अधिकारियों की नजर अब प्रशासनिक अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका पर है। आने वाले दिनों में मनी ट्रेल और दस्तावेजों के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है। एजेंसी वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही है।