
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार का स्वरूप तेजी से बदलता नजर आ रहा है। अब तक ड्रग्स तस्करी में महिलाओं की भूमिका अक्सर डिलीवरी या सहयोगी के तौर पर सामने आती थी, लेकिन अब कई मामलों में महिलाएं मुख्य सरगना के तौर पर सक्रिय पाई जा रही हैं।
जांच एजेंसियों के सामने आए मामलों में यह भी सामने आया है कि कुछ महिला आरोपियों ने ड्रग्स के अवैध कारोबार के जरिए छोटे स्तर से शुरुआत कर करोड़ों रुपये की संपत्ति तक जुटाई। बदलते पैटर्न को देखते हुए दिल्ली में नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाने वाली टीमों की रणनीति में भी बदलाव की तैयारी की जा रही है।
महिलाओं की बढ़ती भूमिका को देखते हुए एंटी-नारकोटिक्स टीमों में अधिक महिला पुलिसकर्मियों को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि महिला संदिग्धों की तलाशी, पूछताछ और निगरानी जैसी कार्रवाई में महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकती है।
जांच में सामने आए मामलों से संकेत मिलता है कि कुछ महिला अपराधी ड्रग्स के नेटवर्क में छोटी भूमिका से शुरुआत करने के बाद धीरे-धीरे बड़े स्तर पर सक्रिय हुईं। इसके बाद उन्होंने अवैध कमाई से संपत्ति और अन्य परिसंपत्तियां जुटाईं।
ऐसे मामलों में पुलिस के सामने सिर्फ ड्रग्स की बरामदगी ही नहीं, बल्कि अवैध कमाई से बनाई गई संपत्ति और पूरे नेटवर्क का पता लगाने की चुनौती भी रहती है।
ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क में महिलाओं की बढ़ती भूमिका ने एंटी-नारकोटिक्स एजेंसियों के लिए जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। अब पुलिस ऐसे नेटवर्क में महिलाओं की भूमिका, उनके संपर्कों, वित्तीय लेन-देन और संपत्ति से जुड़े मामलों की भी गहन जांच पर जोर दे रही है।
राजधानी में नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस का फोकस अब केवल सप्लायर और डिलीवरी नेटवर्क तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे संगठित नेटवर्क और उसके वित्तीय ढांचे को खंगालने पर भी रहेगा।
महिला तस्करों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए एंटी-नारकोटिक्स टीमों में महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी बढ़ाने का कदम ड्रग्स नेटवर्क की जांच और कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।