
दिल्ली के टिकरी मेट्रो स्टेशन के पास सीएनजी फिलिंग स्टेशन पर बुधवार को हुए भीषण हादसे में तीन कर्मचारियों की मौत के बाद हादसे में शामिल ट्रक की नियमों की अनदेखी का लंबा रिकॉर्ड सामने आया है। HR63D9900 नंबर के इस ट्रक पर करीब 1.55 लाख रुपये के नौ चालान लंबित बताए जा रहे हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि हादसे से महज दो दिन पहले, 17 अगस्त को ट्रक का 76 हजार रुपये का ओवरलोडिंग चालान किया गया था। इसके बावजूद ट्रक दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से होते हुए 19 अगस्त को टिकरी स्थित सीएनजी स्टेशन तक पहुंच गया।
रिकॉर्ड के मुताबिक, 14 जुलाई 2024 को परमिट उल्लंघन के लिए 10 हजार रुपये और इसी दिन नंबर प्लेट साफ नहीं दिखने पर 15 हजार रुपये का चालान हुआ था। इसके बाद 30 जुलाई 2024 को नो-एंट्री में प्रवेश के दो मामलों में 25-25 हजार रुपये, यानी कुल 50 हजार रुपये के चालान किए गए।
वहीं, 19 फरवरी 2025 को गलत पार्किंग के लिए 500 रुपये का चालान हुआ। वर्ष 2026 में 6 फरवरी और 16 अप्रैल को लेन बदलने पर 1500-1500 रुपये तथा 6 मई को बिना नंबर प्लेट के चलने पर 500 रुपये का चालान दर्ज हुआ। इसके बाद 17 अगस्त को ओवरलोडिंग के लिए 76 हजार रुपये का चालान किया गया।
इन तमाम कार्रवाई के बावजूद ट्रक सड़कों पर चलता रहा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बार-बार नियम तोड़ने और भारी जुर्माने के बावजूद ट्रक को रोकने या उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इससे ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
रिकॉर्ड के अनुसार ट्रक का पंजीकरण 7 मार्च 2017 को हुआ था और करीब नौ साल पुराने इस वाहन का स्वामित्व अब चौथे मालिक के नाम है। कागजों में इसकी फिटनेस 28 फरवरी 2027, प्रदूषण प्रमाणपत्र 29 सितंबर 2026, पंजीकरण 28 फरवरी 2027 और बीमा 9 मार्च 2027 तक वैध बताया गया है।
यानी दस्तावेजों के स्तर पर वाहन की स्थिति वैध थी, लेकिन चालानों का रिकॉर्ड बताता है कि सड़क पर नियमों के उल्लंघन का सिलसिला लगातार जारी था। अब हादसे के बाद यह सवाल गंभीर हो गया है कि केवल चालान काटना पर्याप्त है या ऐसे वाहनों के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई भी जरूरी है।