उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हरिद्वार के एक कारोबारी के बैंक खाते को फ्रीज करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बैंक की कार्रवाई को गलत ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के किसी बैंक खाते को फ्रीज नहीं किया जा सकता। साथ ही पुलिस भी बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए खाते की रकम पर रोक नहीं लगा सकती, जब तक कोई आपराधिक मामला दर्ज न हो।
मामला हरिद्वार के कारोबारी मुनव्वर के कोटक महिंद्रा बैंक की शिवालिक नगर शाखा के खाते से जुड़ा है। खाते में 44 लाख रुपये आने के बाद 10 अक्टूबर 2025 को बैंक ने इसे फ्रीज कर दिया था। बैंक को यह जानकारी दी गई थी कि यह रकम गलती से ट्रांसफर हुई है।
कारोबारी ने खाते पर लगी रोक को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने बैंक की कार्रवाई को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए खाता तत्काल चालू करने के निर्देश दिए।
हाई कोर्ट के इस फैसले से कारोबारी को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बैंक खातों पर कार्रवाई करते समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। फैसले को बैंकिंग व्यवस्था और खाताधारकों के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।