
शिमला। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आपराधिक मामले में बरी हो चुके शास्त्री (PTA) शिक्षक अनिल कुमार को बड़ी राहत दी है। अदालत ने शिक्षा विभाग के उन आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनमें शिक्षक की सेवा बहाली की मांग को खारिज किया गया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब आपराधिक मुकदमे का आधार ही खत्म हो गया है तो कर्मचारी को नौकरी से वंचित नहीं रखा जा सकता।
याचिकाकर्ता अनिल कुमार की नियुक्ति वर्ष 2008 में शास्त्री (PTA) शिक्षक के रूप में हुई थी। वर्ष 2019 में महिला पुलिस थाना नाहन में उनके खिलाफ आईपीसी की धाराओं 452, 376 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले के आधार पर शिक्षा विभाग ने बिना किसी विभागीय जांच के उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं।
इसके बाद विशेष अदालत सिरमौर ने 12 अगस्त 2023 को शिक्षक को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। बरी होने के बाद अनिल कुमार ने सेवा बहाली के लिए विभाग से संपर्क किया, लेकिन विभाग ने जिला न्यायवादी की राय और नियमों का हवाला देते हुए उनकी मांग को खारिज कर दिया।
विभाग की ओर से तर्क दिया गया था कि शिक्षक को बरी होने का लाभ केवल तकनीकी आधार पर मिला है और अनुबंध समझौते में बर्खास्तगी के बाद बहाली का कोई प्रावधान नहीं है।