
शिमला। हिमाचल प्रदेश की 3,758 ग्राम पंचायतों को 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि फिलहाल अटक गई है। केंद्र सरकार ने अनुदान जारी करने से पहले पंचायतों के लिए चार अनिवार्य शर्तें तय की हैं। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही पंचायतों को वित्त आयोग की राशि जारी की जाएगी।
पंचायती राज विभाग की समीक्षा में सामने आया है कि प्रदेश की अधिकांश पंचायतें अभी भी ऑनलाइन वित्तीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह पूरा नहीं कर सकी हैं। ऐसे में हजारों पंचायतों की ग्रांट पर फिलहाल संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
14वें वित्त आयोग की पूरी अनुदान राशि का उपयोग।
वर्ष पुस्तिका (ईयर बुक) का समापन।
31 मार्च तक कैश बुक का बंद होना और ऑनलाइन ऑडिट पूरा होना।
समर्थ पोर्टल पर पंचायतों की आय और अन्य वित्तीय विवरण दर्ज होना।
पंचायती राज विभाग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की 3,758 पंचायतों में से केवल 352 पंचायतों ने ही टैक्स और नॉन-टैक्स मॉड्यूल कॉन्फिगर किया है।
776 पंचायतों के 16वें वित्त आयोग से जुड़े बैंक खाते अभी तक अपडेट नहीं हुए हैं।
2,982 पंचायतों ने बैंक खाते अपडेट कर दिए हैं।
371 पंचायतों की वर्ष पुस्तिका अभी तक बंद नहीं हुई है।
96 पंचायतें अब तक 14वें वित्त आयोग की पूरी राशि खर्च नहीं कर पाई हैं।
करदाता पंजीकरण के मामले में लाहौल-स्पीति सबसे पीछे है, जहां 84.46 प्रतिशत करदाता अभी भी पंजीकरण की प्रतीक्षा में हैं। इसके बाद चंबा (55.89%) और कांगड़ा (50.91%) का स्थान है। वहीं सोलन में केवल 5.84 प्रतिशत करदाता ही पंजीकरण की प्रतीक्षा में हैं, जिससे वहां की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा रही है।
पंचायती राज विभाग ने सभी जिलों को लंबित कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का उद्देश्य पंचायतों में टैक्स संग्रह, लेखा-जोखा और वित्तीय प्रबंधन को पूरी तरह ऑनलाइन करना है, ताकि 16वें वित्त आयोग की राशि समय पर जारी हो सके।
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि सभी बीडीओ (BDO) को एक सप्ताह के भीतर लंबित कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए है