
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने दुर्गम, जनजातीय, कठिन और अति दुर्गम क्षेत्रों में कर्मचारियों की तैनाती एवं तबादला नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत 55 वर्ष से अधिक आयु के अधिकारियों और कर्मचारियों को यथासंभव इन क्षेत्रों में स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। हालांकि, यह छूट पदोन्नति (प्रमोशन) से जुड़े मामलों में लागू नहीं होगी। यदि पदोन्नति के बाद ऐसे क्षेत्र में नियुक्ति आवश्यक होगी, तो संबंधित कर्मचारी को वहां कार्यभार संभालना होगा।
कार्मिक विभाग द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 (सीजीपी-2013) के पैरा 16.1 में संशोधन किया गया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार दुर्गम, जनजातीय, कठिन और अति दुर्गम क्षेत्रों में सामान्य कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित रहेगा, जिसमें दो सर्दियां और तीन गर्मियां शामिल होंगी।
नई नीति के तहत कर्मचारियों के कार्यकाल की गणना केवल उनकी वास्तविक तैनाती अवधि के आधार पर की जाएगी। यदि कोई कर्मचारी लंबी छुट्टी पर रहता है या किसी अन्य कारण से सेवा से अनुपस्थित रहता है, तो उस अवधि को कार्यकाल में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में कर्मचारी को उतनी अतिरिक्त अवधि तक संबंधित क्षेत्र में सेवाएं देनी होंगी, ताकि तीन वर्ष की वास्तविक तैनाती पूरी हो सके।
सरकार ने अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। यदि कोई अधिकारी किसी दुर्गम या जनजातीय क्षेत्र के पद का केवल अतिरिक्त प्रभार संभालता है और वहां नियमित रूप से नियुक्त नहीं है, तो उस अवधि को न तो निर्धारित कार्यकाल में गिना जाएगा और न ही दुर्गम क्षेत्र में सेवा के आधार पर मिलने वाली किसी रियायत, वरीयता, प्रोत्साहन या अन्य लाभ के लिए मान्य माना जाएगा।
कार्मिक विभाग ने सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों और जिला प्रशासन को संशोधित प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
सरकार का कहना है कि तबादला नीति में पांच पसंदीदा स्टेशनों के विकल्प, दुर्गम क्षेत्रों में कार्यकाल की गणना और अतिरिक्त प्रभार को लेकर लंबे समय से भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। नई अधिसूचना के बाद इन सभी बिंदुओं पर स्पष्टता आ गई है, जिससे भविष्य में तबादलों और सेवा अवधि को लेकर विवाद की संभावना कम होगी।