
धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो ने धर्मशाला से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला वर्ष 2013 से 2023 के बीच आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों से जुड़ा है।
विजिलेंस के अनुसार प्रारंभिक जांच में आयकर रिटर्न, चुनावी हलफनामे, संपत्ति रिकॉर्ड, लोक निर्माण विभाग के दस्तावेज, हाउस बिल्डिंग एडवांस और संपत्ति मूल्यांकन रिपोर्ट सहित कई वित्तीय दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि घोषित वैध आय की तुलना में उनकी संपत्ति और खर्च अधिक प्रतीत हुए, जिसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
जांच के दायरे में सुधीर शर्मा की चल-अचल संपत्तियां, बैंकिंग रिकॉर्ड, निवेश, डिजिटल साक्ष्य, वित्तीय लेनदेन और धर्मशाला के रक्कड़ स्थित उनके आवास के निर्माण, इंटीरियर व फर्निशिंग पर हुए खर्च का भी तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच निरीक्षक नरेश कुमार को सौंपी गई है।
एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए सुधीर शर्मा ने कहा कि वह फिलहाल दिल्ली दौरे पर हैं और लौटने के बाद विस्तृत जवाब देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। उनका कहना है कि पहले भी उनके खिलाफ कई बार जांच हो चुकी है और उन्होंने हर जांच में पूरा सहयोग दिया है। उन्होंने कहा, "सांच को आंच नहीं।"
सुधीर शर्मा पहले कांग्रेस सरकार में शहरी विकास मंत्री रह चुके हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मतभेद के बाद उन्होंने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की थी। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हुई और वे भाजपा में शामिल हो गए। उपचुनाव में उन्होंने धर्मशाला सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की।