
वैज्ञानिकों ने बताई वेनेज़ुएला से सबक लेने की जरूरत
वेनेजुएला में आए विनाशकारी ट्विन भूकंप के बाद उत्तराखंड में भी बड़े भूकंप की आशंकाओं को लेकर वैज्ञानिकों ने चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है और इसे सिस्मिक जोन-4 तथा जोन-5 में रखा गया है।
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में पिछले करीब 200 वर्षों से 7 मैग्नीट्यूड से अधिक तीव्रता का कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है, जिसके चलते यहां सिस्मिक गैप बना हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में प्रदेश में 7 से 8 मैग्नीट्यूड तक का शक्तिशाली भूकंप आ सकता है।
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में 30 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इनमें सबसे तीव्र भूकंप 19 जून को पिथौरागढ़ में 3.9 मैग्नीट्यूड का दर्ज किया गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप का सटीक पूर्वानुमान फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन संभावित नुकसान को कम करने के लिए भूकंपरोधी निर्माण को प्राथमिकता देना जरूरी है। आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को 'भूदेव' ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी है। प्रदेश में अभी तक 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए जा चुके हैं, ताकि आपदा के समय लोगों को समय रहते अलर्ट किया जा सके।